ज़रूरी नहीं हर राह पर मोड़ आए,

ज़रूरी नहीं हर लफ़्ज़ का कोई मूल्य हो,

कुछ बातें अधूरी, अनसुनी ही ठीक थीं,

कुछ फ़ैसले ग़लत थे, कुछ नासमझ से।

कई यादें अब दिल में दफ़्न हैं,

जिनमें हम आज भी ठहरे हुए हैं,

अपनी तन्हाई का सामना करते हुए…

हम रुकते हैं, गिरते हैं, फिर उठते हैं,

फिर भी यह ज़िंदगी पल भर को भी कभी रुकती ही नहीं।


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